वो पांच दिन
हां यह कहानी उन पूरे पांच दिनों की है जब 'काल' मेरे घर में आया था। उन पांच दिनों तक मैं रोज सुबह उठती और अपने परिवार को उस 'काल' से बचाने का प्रयास करती। उन पांच दिनों में हर पल चौकन्नी रहती अपने ही घर में छिपती-बचती दिन भर बच्चों को लेकर पलंग पर ही बैठी रहती। मेरे पति और देवर मेरी बातों का विश्वास नही करते थे। पांच िदन मे मुझे कई बार डांट पड़ी। झूठी भी कहा गया। डरपोक और शक्की का खिताब भी दिया गया।
खैर अब पूरी घटना बताती हूँ।
उस दिन धनतेरस का दिन था। मैं रोज सुबह जल्दी ही जाग जाती थी। उस दिन भी जल्दी जाग कर पूजा की तैयारी करनी थी।
सुबह जब बाथरूम मे गई तब थोड़ा अंधेरा ही था।
मै नहा कर आ गई,पूजा की अौर नाश्ता बना कर बच्चों को जगाई, छोटे बेटे को गोद मे लेकर बाथरूम मे गई, वहां का नजारा देखते ही मेरे होश उड़ गए। बहुत बड़ा काले रंग का नाग अपने रौद्र रूप मे बैठा था। मै डरी हुई भाग कर सबको बताई कि बाथरूम में काला नाग बैठा है।
दोनो भाई दौड़े और बाथरूम में देख कर आए, बोले वहां तो कुछ भी नही। मुझे डांट कर वो लोग नहा धो कर तैयार हुए और अाॅफिस चले गए।
मैं डरी हुई थी। बच्चों को पड़ोसी के घर के बाथरूम मे ले गई। शाम को जब इन्हे पता चला कि मैं और बच्चे पड़ोसी का बाथरूम इस्तेमाल कर रहे हैं, तब खूब डांट पड़ी।
लेकिन मै अपने घर का बाथरूम इस्तेमाल करने को तैयार नही थी। बच्चों को भी नही जाने देती। ये और देवर रोज उसी बाथरूम में जाते। दीवाली के दिन हिम्मत कर के मै जब अपने घर के बाथरूम मे गई तब फिर नाग कोने मे ही बैठा था। मैं भाग कर आई और रोने लगी।
ये जाकर देखे और मुझे ना जाने क्या-क्या बोले। शाम को मैं जैसे-तैसे पूजा की, पर डर तो लग ही रहा था। पड़ोस की भाभी जी अच्छी थी, मेरी बात पर विश्वास करके अपना बाथरूम इस्तेमाल करने देती थी।
दीवाली के दूसरे दिन भी नाग सिर्फ मुझे ही दिखा और उस दिन भी मुझे डांट पड़ी।
भाईदूज के दिन मै बोली...यदि आप लोगों को मुझ पर विश्वास नही और पड़ोसी के बाथरूम को इस्तेमाल करने पर एतराज है...तो बच्चों को खुद नहला कर तैयार करें..!
ये मेरी बात मान गए और बेटे को लेकर बाथरूम मे गए, अगले ही पल वापस आकर बोले ...अरे सच मे बहुत 'बड़ा 'है, इतना बड़ा कि उसे मारना अपने 'बस' की बात नही.!
अब हथियार की तलाश शुरू हुई, आस-पास के लोग आ गये। बहुत मेहनत करके उसे मारा गया।
'वो' 'पांच दिन' से हमारे घर में था। सिर्फ मुझे डराता था। सबने कहा कि नाग की पूजा करो, ईश्वर को धन्यवाद कहो, घर में पांच दिन तक रहने के बावजूद उसने हमें कोई नुकसान नही पहुंचाया। हमने नारियल और अगरबत्ती से शंकर जी की पूजा किये और 'जान बची तो लाखों पाए' मंत्र का जाप किए।
शायद 'उसे' मुक्ती चाहिए थी। जो भी हो 'वो पांच दिन' भयानक थे, कष्टदाई भी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें