पेड़ और माली
सब की एक कहानी होती है। सबका एक समय होता है।
फलों से लदा हुआ पेड़ कभी उस एक बीज के बारे मे कहां सोचता है ? जिसे किसी माली ने बोया और सींचा था।
बीज कैसे पेड़ बना और फलों से लदा?
इस कहानी को सुनने के लिए समय कहां है? पेड़ तो अपने फलों को गिन कर ही खुश हो रहा है। माली भी अब कहां ?
उसे तो और भी कई पेड़ लगाने थे। माली की भी अपनी ही कहानी थी। बीज से पेड़, पेड़ से फल, फल से बीज के चक्र को अंजाम देता रहा। बहुत समय बीत गया पर माली कभी उस बड़े पेड़ के पास नही गया। पेड़ हर साल माली का इंतजार करता।
अचानक एक दिन माली थका हारा उस बड़े पेड़ के नीचे रूका... पेड़ खुशी से झूम कर माली का स्वागत किया। कई फल माली के कदम चूमने लगे, माली पेड़ का आकार देख कर खुश था।
फल खा कर तृप्त हुआ। थोड़ा विश्राम करने के बाद माली फिर चल पड़ा। उसी पेड़ के कुछ फल और बीज अपने हाथों मे सम्भालते हुए। वह और पेड़ लगाएगा। पेड़ भी खुशी से झूमता और इतराता रहा। पेड़ सोच रहा था....."एक बीज के बदले कई बीज माली को दे कर उसने आज माली का कर्ज चुका दिया"। माली सोच रहा था...."परिश्रम का फल मीठा था"।
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