सोमवार, 28 जुलाई 2014

अनहोनी

                                               अनहोनी 

'अनहोनी' मंदिर पचमढ़ी के पास है, हम पचमढ़ी से लौट रहे थे, 'अनहोनी' माता के दर्शन करने  मंदिर तक गए। वहां के पुजारी ने हमे देवी मां की महत्ता बताए। 
वहां एक गर्म पानी का कुन्ड प्राकृतिक रूप से है। 
सिर्फ गरम ही नही बल्कि खौलता हुआ पानी। कहा जाता है कि उस पानी से नहाने वाले को चर्म रोग नही होता, यदि चर्मरोग है तो वह पूर्ण रूप से रोग से छुटकारा पा सकता है, है ना आश्चर्य की बात? 
हां यही 'अनहोनी' बात  है  उस मंदिर की और कुन्ड मे नहाने की। हम भी इस आश्चर्य को देखने पहूंचे। वहां और भी कई लोग थे। देवी की पूजा गरम पानी मे नहाने के बाद ही करनी थी। 
लोटे से पानी निकाल कर धीरे-धीरे अपने ऊपर डाल कर नहाना था,या यूं कहें कि उस पानी को अपने ऊपर छिड़कना था। 
मै और दीदी महिलाओं वाली घाट पर नहा लिए। ये जीजाजी के साथ थे, दोनो नहा कर कपड़े बदल चुके थे। 
तभी जीजाजी की आवाज आई...रवि गिर गया.... मै दौड़ी कुंड के पास, वहां जो देखी वह बहुत भयानक था।
ये गरम कुंड में गिरे थे, चिल्ला रहे थे....मैं जल रहा हूं....मुझे बचाओ....बचाओ...बचाओ, 
मैं दीदी और जीजाजी कुंड के पास थे पर हम कुछ भी नही कर पा रहे थे। कुछ देर कोशिश करने के बाद ये स्वयं ही बाहर निकले। मै दूसरे कपड़े दी। कपड़े बदल कर वहीं चारपाई पर लेटे। 
बहुत डरे हुए थे,खूब जलन हो रही थी। हाथ पैर मे चोट भी लगी थी। 
बाद मे वहां के पंडित ने बताया कि किस तरह लोग 'चर्म रोग' के इलाज के लिए आते हैं, परंतु कईयों के साथ ऐसा भी हुआ कि इसी कुंड मे गिरे और पूरी 'चमड़ी' ही उधड़ गई। 
यही 'अनहोनी'.....जो 'हो' गई थी......!!

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