रविवार, 30 मार्च 2014

Fwd: samay



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From: Shabnam Verma <shabnam.rkv@gmail.com>
Date: Sunday, May 26, 2013
Subject: samay
To: Shabnam Verma <shabnam.rkv@gmail.com>




---------- Forwarded message ----------
From: Shabnam Verma <shabnam.rkv@gmail.com>
Date: 2012/4/5
Subject: samay
To: Shabnam Verma <shabnam.rkv@gmail.com>


समय कभी रुकता नहीं,
जीवन चलते रहने
का ही नाम है ,
लेकिन कभी कभी
समय रुक जाता है,
जब समय रुक जाता है
तो किसी भी समय का इंतजार नहीं होता
कब दिन निकला कब,रात हुई?
क्या खाया ,क्या पहना?
कुछ याद नहीं होता,
हाँ एक आने वाली तारीख याद होती है
और उसी इंतजार में वो रुका हुआ समय भी अच्छा लगने लगता है
इसी रुके हुए समय में हम अपनी पिछली बातों को भी याद करते हैं,
कभी खुश होते हैं तो कभी दुखी,
परन्तु जब समय रुक जाता है तो सुख दुःख का एहसास भी नहीं होता.
शबनम .................................................................................




Fwd: मोह



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From: Shabnam Verma <shabnam.rkv@gmail.com>
Date: Sunday, March 30, 2014
Subject: मोह
To: Shabnam Verma <shabnam.rkv@gmail.com>


                                                  मोह
छोटे से गाँव मे एक किसान अपनी पत्नी एवं बेटा-बहू के साथ रहता था।खेती करते हुए अपने परिवार के साथ खुश था।एक दिन साधारण सी बीमारी मे ही किसान की पत्नी का निधन हो गया। किसान और बेटा-बहू  दु:खी हो गए । दु:ख के कारण कुछ ही दिनो के बाद किसान भी चल बसा।बेटा बहू अपनी खेती बाड़ी मे लग कर अपनी गृहस्थी की गाड़ी पूर्ववत ् चलाने लगे।एक दिन किसान का बेटा जब खेत से लौट रहा था तब रास्ते मे एक कुत्ते का पिल्ला दिखा उसने उसे गोद मे उठाया और अपने घर ले आया।कुत्ता घर मे पलने लगा।कुछ दिनों के बाद किसान के घर गाय ने एक प्यारी सी बछड़ी को जन्म दिया।कुत्ता बछड़ी को देख कर बहुत खुश हुआ।जब रात को  सब सो गए तब कुत्ता बछड़ी से पुछा ... तुम मुझे  पहचानती हो?बछड़ी ने सिर हिला कर हां कहा।फिर बछड़ी ने कुत्ते से पुछा ....तुम यहां? कुत्ते ने जवाब दिया... हां जब तुम चली गई तब मेरा मन नही लगा और मैं भी चला गया।लेकिन बेटे -बहू का मोह खत्म नही हुआ था सो कुत्ता बना कर ईश्वर ने वापस इसी घर में भेज दिया।अरे हां अब तुम बताओ ,तुम भी तो यहीं आ गई?
बछड़ी बोली...हां मेरा मन कहीं और नही लग सकता था सो ईश्वर ने मुझे भी यहीं भेज दिया।अब कुत्ता घर की रखवाली करता,बछड़ी अपनी आंखों से अपने बेटे बहू को निहारती उनके बच्चों के साथ खेलती।बहुत दिन बीत गए ।बछड़ी अब बड़ी हो गई थी।कुत्ता भी बड़ा हो गया था।दोनोअपने पिछले जनम को याद करते और इस जनम को सराहते कि हम अपने ही बच्चों के काम आ रहे हैं।गाय को प्रथम रोटी और कुत्ते को अंतिम रोटी प्रतिदिन मिलती ,दोनो चाव से खाते ,खुश रहते।एक दिन गाय को एक दूसरी गाय ने सींग मारी गाय घायल हो गयी।कुत्ता यह देख दु:खी हुआ।फिर एक दिन गाय मर गई।कुत्ता दु:खी रहने लगा ।किसान के बेटा बहू भी उदास रहने लगे।एक दिन कुत्ा भी मर गया।कुछ दिन और बीते।फिर एक दिन जब किसान का बेटा अपने खेत में हल चला रहा था और उसके बच्चे वहीं खेल रहे थे,बच्चों ने देखा एक गोबरैला खेत मे चल रहा है ,बच्चों ने गोबरैला को मारना चाहा ,बच्चों की मां ने गोबरैले को मारने से मना किया,उसने अपने बच्चों को बताया कि कैसे गोबरैला खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।गोबरैला सारी बातें सुन रहा था और खुश हो रहा था,तभी गोबरैले को एक केंचुआ दिखी,गौबरैला बहुत खुश हुआ।उसने केंचुए से पूछा ़़़..... तुम? केंचुआ बोली .... हां मैं! देखो हम दोनो मिल कर अपने बच्चों की कुछ तो मदद कर ही रहै हैं।गोबरैला बोला ....लेकिन हम कब तक इस जीवन चक्र मे फंसे रहेंगे?
केंचुआ बोली ..... जब तक हम अपना मोह नही त्यागेंगे! ू
गोबरैला बोला ... मोह कोई वस्तु नही जिसे छोड़ा जा सके,यदि सभी मोह त्याग दें तो इस सृष्टी का क्या होगा?जो जैसा चल रहा है चलने दो,
हम फिर मिलेंगे अपने ही बच्चों के आस - पास  किसी और रूप में।


Shabnam Verma
Bangalore