ग्रहण कई प्रकार के होते हैं,
सूर्यग्रहण,चंद्रग्रहण,पाणिग्रहण (शुभ विवाह ),भूख लगने पर भोजनग्रहण,एवं किसी कार्य को पूरा करने के लिए शपथग्रहण .
इन सभी ग्रहण में सबसे बड़ा ग्रहण,भोजनग्रहण है जिसे हम प्रति दिन करते हैं,
जिसके बिना जीवन नामुमकिन है और जीवन के सारे अच्छे बुरे कार्य इसी ग्रहण के लिए किया जाता है ,
फिर पाणिग्रहण जीवन को आगे बढाने के लिए आवश्यक होता है.
यह ग्रहण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक बार अवश्य होता है,
इस ग्रहण के भी अपने कुछ नियम हैं,मसलन क्या पहनना है,क्या खाना है,कौन शामिल होगा,क्या उपहार देना है,और क्या उपहार लेना है?
यह एक बहुत बड़े जलसा के रूप में मनाया जाता है,बाद में इसके जलवे भी दिखते हैं .
खैर ग्रहण तो ग्रहण होता है ,कुछ फायदे तो कुछ नुक्सान भी होना वाजिब है .सूर्यग्रहण ,चन्द्रग्रहण और शपथग्रहण यह हमें कभी कभी ही देखने को मिलता है ,
सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के विषय में वैज्ञानिक और ज्योतिष अपने-अपने अनुसार देखने और ना देखने का कारण बताते हैं, और उसका नुक्सान एवं फाएदे भी बताते है.
परन्तु शपथग्रहण के बारे में ऐसी कोई बात नहीं.पहले तो कभी देखे ना देखे कोई फर्क नहीं पड़ा,
बस न्यूज़ पेपर से पता चल जाता था कि कब कौन से राष्ट्रपति ने शपथग्रहण लिया.
लेकिन आज-कल कई दिन पहले ही घोषणा होने लगी और टीवी के माध्यम से काफी प्रचार भी होने लगा.
शपथग्रहण और भी कई अलग-अलग पद एवं कार्य के लिए होता है,
जैसे सभी नेता अपने-अपने पद एवं कार्य के लिए इसे ग्रहण करते हैं. २५ जुलाई उस शपथग्रहण का दिन होता है जो देश का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है,
यह दिन हर पांच वर्ष में एक बार हमे देखने और सुनने का मौका मिलता है
यह हमारे राष्ट्रपति के शपथग्रहण का दिन होता है ,
२५ जुलाई २०१२ को तेरहवें राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने देश कि सुरक्षा,तरक्की और सुखी रखने कि शपथग्रहण लिया. इसके पहले भी सभी पूर्व राष्ट्रपति ने शपथग्रहण लिया. २५ जुलाई को दिन भर टीवी पर राष्ट्रपति के शपथग्रहण का कार्यक्रम दिखाया गया.
हमने भी बड़े चाव से और बड़े ध्यान से देखे,क्यों-कि यह मौक़ा अब से ठीक पांच वर्ष के बाद ही आयेगा.
इस शपथग्रहण को न सिर्फ देखी बल्कि सुनी भी.
इसे देखने कि एक अच्छी बात यह थी कि कोई चश्मा लगा कर देखने कि हिदायत नहीं दी गई थी,
न आखों पर जोर पड़ने वाला था और न ही कानो को कोई नुक्सान होने का डर था.
एक और बात,इस शपथग्रहण को दिखाते समय मीडिया वालों कि किसी ज्योतिष या वैज्ञानिक को लेकर बहस नहीं चल रही थी.
अत: कुल मिला कर देखने योग्य नजारा था.
२५ जुलाई को ही पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी अपने शपथग्रहण से मुक्त भी हो गई.
सचमुच अद्भुत है यह शपथग्रहण.
अब इस शपथग्रहण के साथ पूरा देश है .
सूर्यग्रहण,चंद्रग्रहण,पाणिग्
इन सभी ग्रहण में सबसे बड़ा ग्रहण,भोजनग्रहण है जिसे हम प्रति दिन करते हैं,
जिसके बिना जीवन नामुमकिन है और जीवन के सारे अच्छे बुरे कार्य इसी ग्रहण के लिए किया जाता है ,
फिर पाणिग्रहण जीवन को आगे बढाने के लिए आवश्यक होता है.
यह ग्रहण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक बार अवश्य होता है,
इस ग्रहण के भी अपने कुछ नियम हैं,मसलन क्या पहनना है,क्या खाना है,कौन शामिल होगा,क्या उपहार देना है,और क्या उपहार लेना है?
यह एक बहुत बड़े जलसा के रूप में मनाया जाता है,बाद में इसके जलवे भी दिखते हैं .
खैर ग्रहण तो ग्रहण होता है ,कुछ फायदे तो कुछ नुक्सान भी होना वाजिब है .सूर्यग्रहण ,चन्द्रग्रहण और शपथग्रहण यह हमें कभी कभी ही देखने को मिलता है ,
सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के विषय में वैज्ञानिक और ज्योतिष अपने-अपने अनुसार देखने और ना देखने का कारण बताते हैं, और उसका नुक्सान एवं फाएदे भी बताते है.
परन्तु शपथग्रहण के बारे में ऐसी कोई बात नहीं.पहले तो कभी देखे ना देखे कोई फर्क नहीं पड़ा,
बस न्यूज़ पेपर से पता चल जाता था कि कब कौन से राष्ट्रपति ने शपथग्रहण लिया.
लेकिन आज-कल कई दिन पहले ही घोषणा होने लगी और टीवी के माध्यम से काफी प्रचार भी होने लगा.
शपथग्रहण और भी कई अलग-अलग पद एवं कार्य के लिए होता है,
जैसे सभी नेता अपने-अपने पद एवं कार्य के लिए इसे ग्रहण करते हैं. २५ जुलाई उस शपथग्रहण का दिन होता है जो देश का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है,
यह दिन हर पांच वर्ष में एक बार हमे देखने और सुनने का मौका मिलता है
यह हमारे राष्ट्रपति के शपथग्रहण का दिन होता है ,
२५ जुलाई २०१२ को तेरहवें राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने देश कि सुरक्षा,तरक्की और सुखी रखने कि शपथग्रहण लिया. इसके पहले भी सभी पूर्व राष्ट्रपति ने शपथग्रहण लिया. २५ जुलाई को दिन भर टीवी पर राष्ट्रपति के शपथग्रहण का कार्यक्रम दिखाया गया.
हमने भी बड़े चाव से और बड़े ध्यान से देखे,क्यों-कि यह मौक़ा अब से ठीक पांच वर्ष के बाद ही आयेगा.
इस शपथग्रहण को न सिर्फ देखी बल्कि सुनी भी.
इसे देखने कि एक अच्छी बात यह थी कि कोई चश्मा लगा कर देखने कि हिदायत नहीं दी गई थी,
न आखों पर जोर पड़ने वाला था और न ही कानो को कोई नुक्सान होने का डर था.
एक और बात,इस शपथग्रहण को दिखाते समय मीडिया वालों कि किसी ज्योतिष या वैज्ञानिक को लेकर बहस नहीं चल रही थी.
अत: कुल मिला कर देखने योग्य नजारा था.
२५ जुलाई को ही पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी अपने शपथग्रहण से मुक्त भी हो गई.
सचमुच अद्भुत है यह शपथग्रहण.
अब इस शपथग्रहण के साथ पूरा देश है .