रविवार, 5 अगस्त 2012

शपथग्रहण

ग्रहण कई प्रकार के होते हैं,
सूर्यग्रहण,चंद्रग्रहण,पाणिग्रहण (शुभ विवाह ),भूख लगने पर भोजनग्रहण,एवं किसी कार्य को पूरा करने के लिए शपथग्रहण .
इन सभी ग्रहण में सबसे बड़ा ग्रहण,भोजनग्रहण है जिसे हम प्रति दिन करते हैं,
जिसके बिना जीवन नामुमकिन है और जीवन के सारे अच्छे बुरे कार्य इसी ग्रहण के लिए किया जाता है ,
फिर पाणिग्रहण जीवन को आगे बढाने के लिए आवश्यक होता है.
यह ग्रहण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक बार अवश्य होता है,
इस ग्रहण के भी अपने कुछ नियम हैं,मसलन क्या पहनना है,क्या खाना है,कौन शामिल होगा,क्या उपहार देना है,और क्या उपहार लेना है?
यह एक बहुत बड़े जलसा के रूप में मनाया जाता है,बाद में इसके जलवे भी दिखते हैं .
खैर ग्रहण तो ग्रहण होता है ,कुछ फायदे तो कुछ नुक्सान भी होना वाजिब है .सूर्यग्रहण ,चन्द्रग्रहण और शपथग्रहण यह हमें कभी कभी ही देखने को मिलता है ,
सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के विषय में वैज्ञानिक और ज्योतिष अपने-अपने अनुसार देखने और ना देखने का कारण बताते हैं, और उसका नुक्सान एवं फाएदे भी बताते है.
परन्तु शपथग्रहण के बारे में ऐसी कोई बात नहीं.पहले तो कभी देखे ना देखे कोई फर्क नहीं पड़ा,
बस न्यूज़ पेपर से पता चल जाता था कि कब कौन से राष्ट्रपति ने शपथग्रहण लिया.
लेकिन आज-कल कई दिन पहले ही घोषणा होने लगी और टीवी के माध्यम से काफी प्रचार भी होने लगा.
शपथग्रहण और भी कई अलग-अलग पद एवं कार्य के लिए होता है,
जैसे सभी नेता अपने-अपने पद एवं कार्य के लिए इसे ग्रहण करते हैं. २५ जुलाई उस शपथग्रहण का दिन होता है जो देश का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है,
यह दिन हर पांच वर्ष में एक बार हमे देखने और सुनने का मौका मिलता है
यह हमारे राष्ट्रपति के शपथग्रहण का दिन होता है ,
२५ जुलाई २०१२ को तेरहवें राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने देश कि सुरक्षा,तरक्की और सुखी रखने कि शपथग्रहण लिया. इसके पहले भी सभी पूर्व राष्ट्रपति ने शपथग्रहण लिया. २५ जुलाई को दिन भर टीवी पर राष्ट्रपति के शपथग्रहण का कार्यक्रम दिखाया गया.
हमने भी बड़े चाव से और बड़े ध्यान से देखे,क्यों-कि यह मौक़ा अब से ठीक पांच वर्ष के बाद ही आयेगा.
इस शपथग्रहण को न सिर्फ देखी बल्कि सुनी भी.
इसे देखने कि एक अच्छी बात यह थी कि कोई चश्मा लगा कर देखने कि हिदायत नहीं दी गई थी,
न आखों पर जोर पड़ने वाला था और न ही कानो को कोई नुक्सान होने का डर था.
एक और बात,इस शपथग्रहण को दिखाते समय मीडिया वालों कि  किसी ज्योतिष या वैज्ञानिक को लेकर बहस नहीं चल रही थी.
अत: कुल मिला कर देखने योग्य नजारा था.
२५ जुलाई को ही पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी अपने शपथग्रहण से मुक्त भी हो गई.
सचमुच अद्भुत है यह शपथग्रहण.
अब इस शपथग्रहण के साथ पूरा देश है .

बुधवार, 25 जुलाई 2012

छोटे परिवार का बड़ा सदस्य कंप्यूटर ही है .

हम एक छोटे शहर में रहते थे वहां का माहौल बिलकुल अलग था ,तब न फोन था और नहीं कंप्यूटर ही था, तब भी सब खुश थे .आज कंप्यूटर का दर्जा सबसे ऊपर है ,होना भी चाहिय .इसी के कारन तो सब आसान हो गया है आज  जब समय बदल चूका है तब बीते दिनों को याद करते हुए बहुत  अजीब लगता है.बीते दिनों को याद सभी करते हैं .यह कोई नई बात नहीं है.यदि हम गुजरे वक्त को याद न करें तो आज के वक्त कि तरक्की का एहसास भी नहीं कर पाएंगे. आज से बीस वर्ष पहले मैं कम्प्यूटर को एक साधारण मशीन ही समझती थी .मेरे अनुसार सिर्फ आफिस  के लिए ही आवश्यक था परन्तु हमारे घर जब कंप्यूटर आया तब मुझे लगा कि समय बिताने के लिए या मनोरंजन के लिए भी एक अच्छी चीज है .उस समय मेरे दोनों बेटे छोटे थे .छठी एवम पाचवीं क्लास में पढ़ते थे.कंप्यूटर खरीदने केलिए बैंक से लोन लिया गया था ६० हजार का .यह रकम वाकई बहुत ज्यादा थी .करीब पांचवर्ष लगे लोन चुकाने में .तब तक बच्चे बड़े हो गए थे और उसी कंप्यूटर में कुछ न कुछ नया करवाते रहते थे .काफी कुछ सीख गए थे.दोनों बच्चों को कंप्यूटर सिखने केलिए बाहर नही जाना पड़ा.यह हमारी पहली उपलब्धी थी .हाँ खर्च होता था परन्तु मन में एक संतोष रहता था कि बच्चे कुछ सिख रहे हैं .स्कूल कि पढाई पूरी हुई फिर कालेज कि भी पढाई पूरी हुई .साथ-साथ कंप्यूटर भी बड़ा होता गया.हर बार कुछ खर्च होता और मुझे लगता कि इतना पैसा सिर्फ कंप्यूटर मे ही  खर्च होजाता है. देखभाल करते करते थोडा बहुत मै भी चलाना सीख गई .टायपिंग करना सीख कर कुछ कुछ टायप करने लगी थी .पर मन में एक कसक हमेशा रहती थी .लेकिन जब बेटों कि पढाई पूरी होते ही जॉब में आगये तब एक दिन यूँ ही बच्चों से किसी बात पर चर्चा चली तो मै कंप्यूटर पर हुए खर्चे की बात करने लगी.तब बड़े बेटे ने मुझे बताया कि यदि घर में कंप्यूटर नहीं होता तो हमे बाहर जाकर सीखना पड़ता और वह राशी इसकी दुगनी होती, फिरभी हम परिपक्व नहीं हो पाते कंप्यूटर में, फिर इंजीनियरिंग कि पढाई में कंप्यूटर के बिना काम भी नही चलता .आज मै देख रही हूँ कि कंप्यूटर के बिना वाकई काम करना कठिन है .आज सब के घर  में कंप्यूटर है .बिजली का बिल ,फोन का बिल ,रेल टिकट, प्लेन का टिकट हो या पढाई कि चीज ,न्यूज हो या किसी से बात करनी हो या फिर मूवी देखनी हो .सब कुछ तो है इसमें .आज के समय के छोटे परिवार का बड़ा सदस्य कंप्यूटर ही है .  

Chhoti Chhoti Baatein

सब कहते हैं कि उम्र के साथ जानकारी भी बढती है,
पर क्या यह सच नहीं है,कि बड़े होने के बाद बहुत सी बातें जो हमें किताबों और अपने बड़ों या अपने गुरु से नहीं पता चली,
वो छोटी या बड़ी बातें आज हमें अपने ही बच्चों से या अपने से छोटों से सीखने का मौका मिल रहा है,
इसी सन्दर्भ में अपना 'एक और' अनुभव लिख रही हूँ,
कुछ दिनों पहले कि बात है,मेरे बड़े बेटे ने जब विदेश से कुछ तस्वीरें भेजी.
उनमे कुछ तस्वीरें वहाँ के भगवान् कि भी थी,जिनके पंख भी बने हुए थे,मै बेटे से पूछी,"क्या विदेशी भगवान् पंख वाले होते है"?
तो उसने कहा, "हाँ, ठीक उसी तरह,जिस तरह अपने' देश' के "भगवान्" दस हाथ ,चार हाथ,चार सर,या सूंडवाले और पूंछ वाले होते हैं,
बात छोटी ही है, पर समझने वाली है,यही समझ मुझे मेरे बेटे ने दिया,यह मेरे लिए 'बड़ी बात' है .